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विस चुनाव से पहले ही जदयू और कांग्रेस के रिश्तों में आने लगी खटास!

बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को रोकने के नाम पर साथ आए दल अभी दो कदम मंजिल की ओर बढ़े भी नहीं कि सरकार के कुछ फैसलों ने सतारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और कांग्रेस के रिश्तों में खटास पैदा कर दी है।
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बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य मंत्रिपरिषद की हुई बैठक में 1974 के जेपी आंदोलन के सेनानियों की पेंशन में वृद्धि करने और उनकी मृत्यु के बाद पत्नी या पति को भी पेंशन दिए जाने का फैसला लिया गया।कांग्रेस में सरकार के इस फैसले को लेकर नाराजगी दिख रही है। हालांकि इस बारे में खुलकर प्रदेश कांग्रेस के किसी पदाधिकारी ने कुछ नहीं कहा लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम चन्द्र मिश्रा ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर इस बारे में अपना विचार जरूर पोस्ट किया है जिसमें सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस की असहजता साफ नजर आ रही है।

मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा है कि 1974 के जेपी आंदोलनकारियों को बिहार सरकार ने दोगुना पेंशन देने और उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को भी पेंशन देते रहने का फैसला सरकार ने लिया है। उन्होंने आगे लिखा है कि 74 में कांग्रेस के खिलाफ जेपी आंदोलन हुआ था और आज जिस सरकार ने ये फैसला लिया है उसको कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है।

कांग्रेस नेता के इस विचार पर कई कांग्रेस समर्थकों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि कांग्रेस अपने पावों पर क्यों कुल्हाड़ी मार रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यह सब दिखाई नहीं देता है। आखिर कब तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नीतीश-लालू के जरिए अपमानित किया जाता रहेगा।

कांग्रेस के एक अन्य समर्थक केशव झा ने कहा कि इसे अभिशाप नहीं तो और क्या कहें, जिनका जन्म हीं कांग्रेस को मृत-मरणासन्न करने के लिए हुआ आज कांग्रेस उनके बीच जीवन की तलाश कर रही है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस का विरोध कई गुणा ज्यादा होगा क्योंकि अब पेंशन की गारंटी दे दी गई है।

इसी तरह प्रवीण पंकज ने कहा कि समझ में नहीं आता है कि कांग्रेस का समाजवाद में विलय हो गया है या उसने अपने सिद्धांतों को बदल दिया है। इस पर रजनीश कुमार भारती ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व का फैसला है तो आम कांग्रेसजनों को इसे न चाहते हुए भी सिर आंखों पर लेना पड़ेगा।

फेसबुक पर हीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद हरेन्द्र प्रताप ने कहा कि क्या कांग्रेस में अब समर्थन वापस लेने का नैतिक बल बचा है या तो वह सरकार से समर्थन वापस ले या अपनी गलती के लिए माफी मांगे।

उधर भारतीय राष्ट्रीय छात्र कांग्रेस (एनएसयूआई) से संबंधित एक पुराने मामले में पैरवी किए जाने को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी के खिलाफ गांधी मैदान थाना में पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक विकास वैभव की ओर से सनहा दर्ज कराने के मामले ने भी तूल पकड़ लिया है।

इस मामले में कांग्रेस नेताओं ने अनुसूचित जाति-जनजाति थाने में एसएसपी के खिलाफ दलित उत्पीडऩ का मामला दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। वहीं चौधरी ने भी एसएसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई करने के लिए परिषद सभापति को पत्र लिखा है।

इस बीच प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य ललन कुमार ने गुरुवार को कहा कि पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक विकास वैभव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इशारे पर अशोक चौधरी को सिर्फ फंसाया ही नहीं है बल्कि बिहार कांग्रेस को अपमानित करने के लिए केस किया है।

उन्होंने कहा कि कुमार और यादव गठबंधन धर्म का पालन करें और एसएसपी सार्वजनिक रूप से माफी मांगे अन्यथा कांग्रेस के कार्यकर्ता यादव और कुमार के विरोध में सड़क पर उतरेंगे।

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