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गहलोत आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबांन में झांकें – भाजपा

 

 

 भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष प्रवक्ता कैलाष नाथ भट्ट ने पत्रकार वार्ता में श्री गहलोत से यह पूछा हैं कि आपने अपने पुत्र, पुत्री एवं अन्य परिजनों के लाभ के लिये कोई काम नहीं किया ? तो फिर ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि आपको 12 मार्च, 2011 को मुख्यमंत्री की हैसियत आपने किसी द्वारा पूछे गये प्रष्नों का उत्तर दिया ? श्री गहलोत ने अपने इस पत्र में यह स्वीकार किया हैं कि उनके पुत्र ने वर्ष 2004 से कुछ सीनियर अधिवक्ताओं के सानिध्य में वकालत प्रारम्भ की, जो नवम्बर, 2008 तक जारी रही। आपने यह भी स्वीकार किया हैं कि फिर आपके पुत्र काॅर्पोरेट सेक्टर में काम करने की रूचि रखने लगा, इसलिए चार कम्पनी के रिटेनर बना, उसमें ओम मेटल ग्रुप व ओम मेटल्स इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. कम्पनी, ओम मेटल्स आॅटो प्रा. लि., ओम मेटल्स इन्फोटेक प्रा. लि. और जूपिटर मेटल प्रा. लि. बनें और इन कम्पनियों ने पाँच-पाँच हजार रूपये प्रतिमाह यानी कुल 20 हजार रूपये प्रतिमाह के रिटेनरषिप पर विधिक सलाह देना चालू किया और अप्रैल, 2009 से यह राषि 30 हजार रूपये प्रतिमाह हो गई। आपसे यह जानना चाहते हैं कि ओम मेटल्स का टर्न ओवर वर्ष 2008 तक 40-50 करोड़ रूपयों का था, जबकि यह कम्पनी 1971 से काम कर रही हैं, तो फिर अचानक इस कम्पनी का व्यवसाय मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव गहलोत की ऐसी कौनसी कानूनी सलाह दी, जिसके कारण पिछले 2 वर्षो में 1 हजार करोड़ रूपये तक गया ?

  1. क्या आपकी सरकार ने इन कम्पनियों को कालीसिन्धी डेम प्रोजेक्ट 450 करोड़ का ठेका।
  2. जयपुर भीलवाड़ा रोड़ का ठेका 312 करोड़ रूपये का।
  3. वर्ष 2010 में 5 एकड़ भूमि महाराजा उम्मेद मिल्स की 158 करोड़ रूपये की भूमि खरीदी और इस बेषकिमती जमीन पर बहुमंजिली इमारत बनाने की स्वीकृति प्रदान की और यह भवन स्टैच्यू सर्किल पर स्थित हैं।
  4. बी.ओ.पी. पाॅवर प्रोजेक्ट 160 मेगावाट जैसलमेर का 210 करोड़ रूपये का।
  5. पी.एफ.बी.एस. वाटर प्रोजेक्ट पोकरण सिवाना का 318 करोड़ का।

भट्ट ने कहा कि आपने अपने पत्र में यह स्वीकार किया हैं कि ट्राइटन होटल में भी आपके पुत्र विधिक सलाहकार के रूप में कार्य कर रहें हैं, उन्होंने वर्ष 2009 में ढ़ाई लाख रूपये और वर्ष 2010 से 50 हजार रूपये प्रतिमाह मिल रहा हैं। इस होटल के निर्माण की स्वीकृति और इसके पड़ौस में जो भूमि थी, वो भी इस होटल को देने की स्वीकृति आपके पुत्र को विधिक सलाहकार बनने के बाद ही मिली हैं। आपने यह भी स्वीकार किया हैं कि सनलाईट कार रेन्टल सर्विसेज प्रा. लि. कम्पनी आपकी पुत्रवधु हिमान्षु गहलोत एवं वैभव गहलोत ने 15 जुलाई, 2008 में बनायीं और इस कम्पनी मंे बाद में रामरतन शर्मा नवम्बर, 2010 में जुडे़ तथा 23 लाख रूपया एच.डी.एफ.सी.बैंक से लोन लेकर कार्य प्रारम्भ किया और आपने यह भी स्वीकार किया हैं कि 17 सितम्बर, 2010 को वैभव ने अपनी वकालत की सनद सरेण्ड़र की और व्यवसाय प्रारम्भ कर दिया। भारतीय जनता पार्टी आपसे पूछना चाहती हैं कि जब वैभव गहलोत वर्ष 2008 से 2010 तक सनलाईट रेन्टल सर्विसेज प्रा. लि. कम्पनी बनायीं, उसके बाद बार कौंसिल आॅफ इण्ड़िया के नियमों के अन्तर्गत क्या वे विधिक सलाहकार के रूप में उक्त कम्पनियों में विधिक व्यवसाय सलाह दे सकते थे।
आपने अपने पत्र में ओम मेटल्स की चारों कम्पनियों एवं ट्राइटन होटल में प्रोफेषनल काम करने की बात स्वीकार करते हुए वहां से प्रतिमाह 80,000 रूपये प्राप्त कर रहें हैं, स्वीकारी हैं और दूसरी ओर आप यह तथ्य भी स्वीकार कर रहें हैं कि आपके पुत्र ने वर्ष 2010 में वकालत की सनद सरेण्डर कर दी, तो फिर आपके पुत्र वैभव गहलोत अब किस हैसियत से उक्त कम्पनियों में विधिक दे रहें हैं और वहाँ राषियाँ प्राप्त कर रहें हैं। उपरोक्त स्वीकारोक्ति “चोर की दाढ़ी में तिनका” होना प्रमाणित नहीं कर रहा हैं। आपके पत्र में ही आपके परिवारों के सदस्यों का उक्त कम्पनियों से संबंध होना प्रमाणित हैं। और आपका पुत्र उक्त कम्पनियों से लाभ कमा रहा हैं और यह कम्पनियां आपके पुत्र की सेवा से लाभ कमा रही हैं। क्या मुख्यमंत्री का पुत्र इन कम्पनियों में ना होता, तो क्या इन कम्पनियों का व्यवसाय जो कई गुणा बढ़ा हैं, वह बढ़ता, जिन लोगों की कोई हैसियत नहीं थी, उनको माॅरीषस के रास्ते से जो राषियाँ प्राप्त हुई हैं।

वह इस बात को प्रमाणित नही करती हैं कि इन सब व्यवसायों के पीछे आप स्वयं खडे़ हैं। चूंकि यह सभी तथ्य आपके स्वयं के पत्र में स्वयं ने ही स्वीकार किया हैं। आपने अपने पत्र में मफत लाल पी. मेहनोत से पारिवारिक संबंध होना स्वीकार किया हैं और अपनी पुत्री का उनके फ्लैट में रहना और उनके परिवार के साथ जुड़ना भी स्वीकार किया हैं। क्या मफत लाल का जो व्यवसाय आपकी सरकार आने के बाद बढ़ा हैं और राजस्थान में जो सम्पतियाँ उन्होंने क्रय की हैं व आपके पुत्री व दामाद उनकी कम्पनी के निदेषक बनें हैं, क्या यह आपके प्रभाव के बिना सम्भव था ? क्या उन्होंनें आपकी पुत्री को बेषकीमती फ्लैट मुम्बई में नहीं दिया ?

भट्ट ने श्री गहलोत से यह भी जानना चाहा कि जोधपुर में जो बेषकीमती माईन्स आपके रिष्तेदारों को आवंटित की गई, उस कैबिनेट की अध्यक्षता आपने स्वयं की थी। आरोप लगने के बाद आपने इन माईन्स आवंटन की जाँच विधानसभा की समिति से करवाने की बात कही। क्या आपने आज तक विधानसभा अध्यक्ष जी को पत्र लिखकर विधानसभा की समिति से उक्त आवंटन की जाँच करवायीं। लेकिन हमारी जानकारी के अनुसार आपने विधानसभा की समिति से जाँच कराने की कोई पहल नहीं की हैं, जो कि आप इस सत्य को छिपाना चाहते हैं।

भट्ट ने कहा कि जोधपुर विष्वविद्यालय में अयोग्य लोगों की जो अवैध नियुक्तियाँ हुई। क्या वह आपकी जानकारी के बाद क्यों नहीं रद्द की गयी। इसके संबंध में आपने आज तक क्या कार्यवाही की। भट्ट ने आरोप लगाया कि गहलोत बड़ी चतुराई से अपने परिजनों को और स्वयं को लाभ पहुँचा रहे हैं, जो उनके पत्र से भी प्रमाणित होता हैं। गहलोत ने यह मान लिया हैं कि अब उनकी सरकार कभी नहीं आयेगी, इसलिए भविष्य के इंतजाम में लगकर समाज कल्याण की जगह परिवार कल्याण का ही काम किया हैं और जनता का ध्यान अपने ऊपर लगे आरोपों से हटाने के लिए बार-बार भारतीय जनता पार्टी की प्रदेषाध्यक्ष श्रीमती वसुन्धरा राजे पर आरोप लगाते रहते हैं, जिनके संबंध में वे आज तक न तो कोई जाँच करा पायें और ना हीं उन्हें उनके विरूद्ध ठोस प्रमाण जुटा पायें। महज बदनाम करने के लिये घीसे-पीटे आरोपों को साढ़े चार साल से दोहरा रहे हैं।

भट्ट ने कहा कि श्री गहलोत की सरकार राजस्थान की सबसे भ्रष्टतम् सरकार हैं। यह सरकार विकास नहीं विनाष के काम में लगी हैं, यह केन्द्र सरकार के आँकड़ों से भी प्रमाणित हैं। और गहलोत अब वसुन्धरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा से बौखलाकर अनर्गल आरोप लगा रहें हैं।

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